About Me

New Delhi, DELHI, India
अपने बारे में क्या कहूँ, एक अनसुलझी पहेली सी हूँ.कभी भीड़ में अकेलापन महसूस करती हूँ! तो कभी तन्हाइयों में भरी महफिल महसूस करती हूँ! कभी रोते रोते हँसती हूँ, तो कभी हंसते हंसते रो पडती हूँ. मैं खुश होती हूँ तो लगता है,सारी दुनिया खुश है,और जब दुखी होती हूँ तो सारी कायनात रोती दिखती है! क्या हूँ मैं, नहीं जानती,बस ऐसी ही हूँ मैं, एक भूलभुलैया.......

Thursday, September 1, 2011

मैं या तुम

आज सपने में उनसे क्या मिली
खो गई न जाने मैं कहाँ
ढूंढा करती हूँ अपने को आईने में
पर वहाँ तो तुम हो मैं कहाँ....

१७/१२/०९

मुहब्बत

अगर उनसे मोहब्बत ना मिले
जिनसे तुम प्यार करते हो ,
तो मुहब्बत उनको जरूर देना
जो आपको प्यार करते हैं.
क्योंकि चाहने से-----चाहे जाने का 
अहसास,
 ज्यादा खूबसूरत होता है...


१/६/२००२

प्यास

जब तुम्हें मुझसे जुदा किया गया तो 
मुझे तुम्हारे मिलन की प्यास थी 
ये तुम्हारे मिलन की ही प्यास थी 
कि मैने राह में कुंआ बनवाया था 
ये तेरे दीदार की ही प्यास थी 
कि मैने हर आते जाते राहगीरों की प्यास पहचानी 
वो पानी पीकर प्यास बुझाते हैं 
तो मुझे तुम्हारे मिलन का एक घूंट 
पानी प्राप्त होता है.
राह चलते मुसाफिरों का ठंडा पानी पीना 
मुझे तेरे दीदार का घूंट देता है..


२७/२/२००१ 

Wednesday, August 31, 2011

देवी

किसी पंडित के कहने पर
        वो रोज फूल तोडकर लाता है
पर, 
    उन फूलों को मंदिर में चड़ाने की जगह 
वो मुझ पर बरसा जाता है,
      सुबह शाम मंदिर जाने को कहा है
इसलिए भोर होते ही और
       शाम ढलते ही 
वो मेरी गली आ जाता है,
      मै  कैसे प्यार करूं जोगी
तू तो मुझे ,
      देवी बनाये जाता है..
 देवी बनाये जाता है..

२८.३.२००१

कौन हूँ मैं

मैं एक लड़की हूँ 

       अभी बिटिया ही मेरी पहचान है 
मैंने राजसी घराने में  जनम लिया है 
        मुझे राजघराने की तरह रहना है 
मुझे मिटटी के खिलोने से नहीं खेलना चाहिए 
        मुझे बाहर गलियों में सखियों के साए
आँख - मिचोली , खो खो नहीं खेलना चाहिए 
         मुझे अपने कमरे में गुड्डे गुडिया से खेलना है 
मुझे दसियों से ज्यादा बात नहीं करनी है ! 
         अब मैं युवा हूँ, 
         शादी शुदा हूँ  
मुझे मेरे पति की सारी अच्छाइयों और 
         बुराइयों के साथ अपनाना है 
बिना कोई प्रश्न किए अभी मुझे सबकी बातें सुन्नी हैं 
         क्योंकि में दूसरे घर (ससुराल) में हूँ 
अब मेरी पहचान मेरे बच्चों की माँ के रूप में हैं 
         अभी मुझे सिर्फ माँ का फ़र्ज़ निभाना है 
अब मैं अधेड हूँ ,
                     मेरे बच्चों की शादी हो चुकी हैं 
इसलिए मुझे नाती पोते खिलाने  हैं 
          मेरा बूढ़ा पति मेरे साथ है 
मुझे उसकी सेवा में भी लीन रहना है 
          और अब 
अब मैं एक लाश हूँ 
        जिसके जाने से किसी को ---------
पर मेरा खाली एक सवाल है 
      इतने रूपों में मेरा वजूद कहाँ है 
बिटिया , बीवी , बहु , बेहेन , दादी , नानी 
     मैं सब कुछ हूँ लेकिन 
मैं,मैं कहाँ हूँ , ये सब तो रिश्ते हैं 
    इन रिश्तों में मैं कहाँ हूँ 
              मैं कौन हूँ                                                
१/८/११

Tuesday, August 30, 2011

अधूरे सपने

सबने कहा हम तेरे साथ हैं
    लेकिन जब मैंने आखिरी साँस ली 
कोई मेरे साथ नहीं था,
 मैं थी और थे मेरे अधूरे सपने ,
जिन्हें मेने दिन रात 
     इस इंतज़ार में संजोया था कि
कभी तो वो मेरे सपने पूरे करेगा,
       अब ना वो सपने हैं और ना वो 
जो शायद खुद  भी मेरे सपनों को 
      पूरा ना कर पाने के कारण
दिन रात अंदर ही अंदर टूट रहा था,
       कोई नही है मेरे ......
१५/८/११

Monday, August 29, 2011

हकीकत

ना जाने क्यों हर समय खोई खोई रहती हूँ 
              अपने ही बुने सपनों को जीने के लिए 
हर समय सोई सोई रहती हूँ ,
           हकीकत में जब सब अंजाना सा लगता हैं
तब अपने ही लिए रोई -रोई फिरती हूँ 
          ना जाने क्यों 
हकीकत में जी नहीं पाती,
      इसी जीने के लिए ,शायद ,
हर समय खोई-खोई रहती हूँ..१२/४/२००६ 

सूरत

ये कैसी उलझन है
   दिल में अजीब सी हलचल रहती है 
किसी से उसका नाम भी सुन लूँ, तो ,
         दिल कि धडकन बड  जाती है,
दिल इतनी जोर से धडकता है कि ,
       कोई और आवाज़ कानो तक पहुँचती ही नहीं .
बस,अजीब सी हालत रहती है 
   ना नींद आती है ,न भूख लगती है,
इक बेचेनी सी  हर वक्त लगी रहती है 
        जिधर भी देखूं उसी की सूरत दिखाई देती है,
अगर नही दिखती तो आईने में देख लेती हूँ 
           औरशरमा  जाती हूँ...
 ६/२/०३     

सपना

रात को इक सपना देखा 
       जो चाहती थी सब अपना देखा,
सुबह आँख खुली तो कुछ ना था 
        लेकिन खुश हूँ कि
सपने में ही सही 
        सब अपना था..

वोह तीसरा आदमी


माँ कहती हैं कि तेरे पति की शक्ल शिवजी से मिलती है .
उनके पास एक पुराना केलेंडर है शिव परिवार का,
हाँ,शायद वो सही कह रहीं है,
तभी तो इनके माथे पे तीसरी आँख है
      लेकिन मेरे विचार में अगर इनको किसी देवता से मिलाना हो तो
मैं  राम से मिलाऊँगी ,क्योंकि
       राम सीता को बहुत प्यार करते थे 
लेकिन वन में अपने साथ लेकर नहीं जाना चाहते थे 
      जब सारे कष्ट उठाकर वन से वापिस आये 
तो इक बाहर के आदमी (धोबी) के कारण 
      उन्हें घर से निकाल दिया 
वो वन में सोई तो राम जमी पर सोए
            और आखिर में भी सीता जी को धरती माँ की
गोद में समाते हुए, देखते रहे,
प्यार तो बहुत किया ,लेकिन ,ऐसा ,
कि ना खुद खुश रहे ,और ना सीताजी
            इसलिए पति पत्नी के बीच कभी भी किसी तीसरे
 (धोबी)को नहीं लाना चाहिए.........
                     OCT.2010