About Me
- MISHTY
- New Delhi, DELHI, India
- अपने बारे में क्या कहूँ, एक अनसुलझी पहेली सी हूँ.कभी भीड़ में अकेलापन महसूस करती हूँ! तो कभी तन्हाइयों में भरी महफिल महसूस करती हूँ! कभी रोते रोते हँसती हूँ, तो कभी हंसते हंसते रो पडती हूँ. मैं खुश होती हूँ तो लगता है,सारी दुनिया खुश है,और जब दुखी होती हूँ तो सारी कायनात रोती दिखती है! क्या हूँ मैं, नहीं जानती,बस ऐसी ही हूँ मैं, एक भूलभुलैया.......
Saturday, May 11, 2013
यादें
ना ,नही दोस्त
मुझे गले से न लगाना
मैं रो पडूँगी
बहुत भरी पड़ी हूँ
जरा सा तेरा प्यार पाकर
मै रो पडूँगी
पहले जब मैं उसकी याद करती थी तो
दिलं गुदगुदा जाता था
लेकिन आज
आज उसकी बाते
रुला जाती है
उसकी सारी वो बाते याद आ रही हैं
जो कभी सपने में भी नही सोच पाती
इसलिए मुझे गले ना लगाओ दोस्त
मैं रो पडूँगी ...............अप्रैल 15\4\13...............
यादें
मुझे गले से न लगाना
मैं रो पडूँगी
बहुत भरी पड़ी हूँ
जरा सा तेरा प्यार पाकर
मै रो पडूँगी
पहले जब मैं उसकी याद करती थी तो
दिलं गुदगुदा जाता था
लेकिन आज
आज उसकी बाते
रुला जाती है
उसकी सारी वो बाते याद आ रही हैं
जो कभी सपने में भी नही सोच पाती
इसलिए मुझे गले ना लगाओ दोस्त
मैं रो पडूँगी ...............अप्रैल 15\4\13...............
यादें
Monday, March 4, 2013
कहाँ हो तुम
तुम कहाँ हो
तुम्हारे बगैर तो मेरा घर ही विरान हो गया है,,
मेरी खनकती हुई हंसी
उदास हो गई है
मेरी सूर्य सी चमकती सिंदूरी बिंदिया
भी फीकी पड़ गई है
फ़ूल पत्ते ,चाँद सूरज सब
सब मुरझा गए हैं ,मौन हो गए हैं
एक अकेलापन छा गया है मुझ में,
तुझे देखने की 
झूठी उम्मीद बंधाती हूँ
तेरे मनाने की आदत
तेरा मुझे अंदर ही अंदर चाहना
मेरे दिल के वीराने में
हलचल(हाहाकार) मचाए है
तेरे बगैर अधूरा सा महसूस कर रही हूँ खुद को
अब आजा,और मुझे पूर्ण कर जा ................
Thursday, February 28, 2013
साया
वो किसका साया है जो
मुझे बिन छुए भी छूकर निकल जाता है…
एक आवाज़ जो मैंने कभी सुनी ही नही
उसी आवाज़ से मैं बातें करती हूँ
वो कौन है जो मुझे अपने अकेलेपन का
एहसास कराना चाहता है,,
मुझसे अपना एकाकीपन बाँटना चाहता है
कभी ख्वाब में,,तो कभी हकीकत में
अपने वजूद में मुझे शामिल करना चाहता है,,
मुझे एक सूनापन दे जाता है
मैं उससे मिलना चाहती हूँ,
उसे छूना चाहती हूँ
उसे अपने शब्दों में पिरोना चाहती हूँ
अपनी सूनी अंखियों में उसे उतारना चाहती हूँ
तन्हाई में उसकी आहट सुनती हूँ
उसके ना होते हुए भी उसे देखती हूँ
बुत बन जाती हूँ
उसकी बाँहों में झूल जाती हूँ
और होश आने पर
तन्हा होती हूँ ,,
Monday, February 18, 2013
झूठा आईना
बचपन से सुनती आई हूँ कि
आईना झूठ नही बोलता
लेकिन मेरा आईना झूठ बोलता है
वो वही बोलता है,
वही दिखता है
जो मैं उससे चाहती हूँ
मेरा आइना झूठा है ..............
16 feb..........13.................
Thursday, February 14, 2013
नाम
क्या नाम रखूं तुम्हारा
क्यों ?
बिना नाम नही पहचानोगी मुझे
हाँ क्यों नही,
क्यों नही पहचानूंगी
तुम तो ख्वाब हो मेरे
हकीकत थोड़े ही हो ,
जो रूप बदल -2 कर आओगे
मुझे तड़पाने को,
फिर तुम मुझे बिन नाम ही रहने दो ,,
नाम दोगी तो
हकीकत में पाने के लिए
आवाज़ लगाओगी ......................14 feb........13...............
कब आओगे
सूर्य के आने के बाद
चले जाते हो आप
चाँद आकर खिड़की से
मेरा उदास चेहरा देखकर
उदास हो जाता है
और जब मैं बालकनी में
झांकती हूँ उम्मीद से 
तो पूछता है मुझसे
वो कब आएँगे ?
मेरे पास कोई जवाब नही है
न चाँद के सवाल का,
न मेरे इंतजार का
जो टकटकी लगाए निहारती है
की शायद अब आप आओ ..................
feb 13........
कब
बरसों बाद उससे मिली
बहुत खुश थी मैं उससे मिलकर
देर तक हम हाथों में हाथ लिए बैठे रहे
बातें करते रहे,हँसते रहे
हँसते -2 आँख भी भर आई,,
मैंने चुपके से आंसुओं को समेट लिया 

बहुत खुश थी मैं उससे मिलकर
अब बिछुड़ना था उसे जाना था
चलते हुए उसने कहा,
अलविदा कहने से पहले
एक बात पूछूं
आखिरी बार कब दिल से हंसी थी ?
feb. 11/13............
तुम नही होते
कौन हो तुम
क्या चाहते हो
जब भी मैं अकेली होती हूँ,,
तुम ख्यालों में मुझसे बातें करते हो
मेरे साथ घूमते भी हो
मैं जब खाना नही चाहती
तुम जबरन खिलते हो
जब मैं रोती हूँ
तब मुझे अपना कान्धा देते हो
उदास होती हूँ
तो बारीश बनकर मुझे भिगो जाते हो
जब भी जहाँ भी होती हूँ,
लेकिन जब मुझे तुम्हारी सबसे ज्यादा
जरुरत होती है
तुम उस पल,उस लम्हा
मेरे साथ नही होते
कभी नही होते,,
क्यों नही होते ...................
jan.13..................
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