About Me

New Delhi, DELHI, India
अपने बारे में क्या कहूँ, एक अनसुलझी पहेली सी हूँ.कभी भीड़ में अकेलापन महसूस करती हूँ! तो कभी तन्हाइयों में भरी महफिल महसूस करती हूँ! कभी रोते रोते हँसती हूँ, तो कभी हंसते हंसते रो पडती हूँ. मैं खुश होती हूँ तो लगता है,सारी दुनिया खुश है,और जब दुखी होती हूँ तो सारी कायनात रोती दिखती है! क्या हूँ मैं, नहीं जानती,बस ऐसी ही हूँ मैं, एक भूलभुलैया.......

Sunday, March 5, 2017

 मैं कौन हूँ /
                मैं भर बहते सागर से
इक लहर  की तरह उठी हूँ ,,
                  अपने सागर को सज़दा करने
जब भी तुम्हे याद करती हूँ,,
         इक आसमानी रंग में ढली
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गुलाबी रौशनी में भीग जाती हूँ,
             तुममे खो जाती हूँ
                                       मिष्टी..........26/2/17

कतरा

ज़िन्दगी एक चिलचिलाती धूप की तरह थी,,
और मैं
    शाम की सुहावनी छांव में
एक कतरा  गुजारने  को तरसती  रही ,,,,मिष्टी ,,feb  17 

एक आस,

 भोगों को हमने नही  भोगा
                  भोगों ने  मुझको भोगा।
मैंने जिंदगी  में तप नही किया
               जिंदगी ने ही मुझको तपा ,दिया,
जिंदगी नही,काल नही,समय नही बीता
        बीती तो मैं ,, स्वयं ही बीतती 
गई
                      आशा ,,   ,
तृष्णा ,ख्वाहिश ,उम्मीद आशा
              कुछ नही मरा
मरी तो मैं
                  सूर्य नही ढला ,,
         ढलती गई मैंImage may contain: 1 person
 शायद एक दिन मैं भी जियूँगी अपनी जिंदगी,,
                                                ज़िन्दगी ढोऊंगी  नही,,
एक आस,,एक उम्मीद एक ख्वाहिश लिए।  मिष्टी>>>>>>>>>-2 2--17 . 


क़लम

सच ही है 
     तुम्हारा सबसे बड़ा राज़दार
                ये कागज़ कलम ही  होते हैँImage result for my pen and paper
 ये सबसे ज्यादा अपने होते हैं 
         जो जिंदगी भर तुम्हारा साथ नहीँ छोडते 
सच है ना पापा 
      आप भी तो मेर साथ छोड़ गए  ना पापा ………… 

मेरी बेटी

मेरी ख्वाहिशों को
दुबारा उपजाकर पालती  मेरी बेटी ,,
            मेरे सोये अरमानो को जगाकर
फिर से उन्हें सजाकर
                           मिटटी में दबे मेरे सपनो को
सींचती मेरी बेटी,,
                      अपने रूप में फिर से मेरा बचपन
वापिस लाती,मेरे कपड़ों में
             वही बचपन को दुलारती मेरी बेटी
नमी ,,अब बड़ी हो गई है..अपने प्यार की नमी से मुझे भिगोती मेरी बेटी...नमी,,,,,,,,,,,,,,,मिष्टी  ...... 

Friday, March 3, 2017

अंजाना साथी

तुझे भूलूं भी तो कैसे भूलूं,,
                तेरे लफ्जों में भीग चुकी हूँ मै
तेरे सामने ना होते हुए भी
                               तुझे रोज देखती हूँ मैं,,
             तुझसे कभी न मिले हुए भी,,
 रोज तेरी छुअन महसूस करती हूँ मैं.Image result for sad images
                        तुझसे कोसो की दूरी होते हुए भी
तेरी धडकन भी सुन सकती हूँ मैं. .. मिष्टी........ feb 17 

जामुनी केक्ट्स

सुनो,,
      हाँ आया था इक बादल,,कहीं दूर बहुत दूर से,,
बरसाया उसने मुझ रेगिस्तान सी पड़ी भूमि पर
बहुत ठंडा सा नमी देता पानी,,
हाँ मैं भीगने भी लगी थी,
मुझमे भी माटी की सुगंध आने लगी थी,,
लेकिन तभी हवा के झोंके सा जैसा वो आया था,
वैसे ही बिन बताये चला गया वो,,
जता गया की रेगिस्तान में बरसात नही
लेकिन उसकी थोड़ी सी महक रह गई मुझमे,
ना चाहते हुए भी
 कोई जामुनी केक्ट्स उग आयाImage result for images cactus flowers
जिन्दगी भर कांटे चुभोने या मेरी गलती जताने को
उफ्फ्फ ये क्या किया. मैंने>>>>>>>>>>>>>मिष्टी


Tuesday, May 31, 2016

आस

ये जो थक -हार के लौटी हैं ,मेरी ख्वाहिशें हैं,,
.....................मैं तो आज भी ,उस मोड़ पर 
आस लगाये बैठी हूँ...मिष्टी...

Sunday, May 15, 2016

अजन्मी

सुनो,,
आज तुम बहुत खुश हो ना,क्योंकि तुम्हे पता चल गया है कि 
मैं तुम्हारी कोख में हूँ
बाबा को भी बता दिया न तुमने और दादी को भी 
बहुत खुश हो ना तुम..
लेकिन ये क्या?,अभी परसों ही तो Dr.आंटी के पास गए थे न
फिर?
मुझे आने में तो समय है ना माँ
फिर क्यों ये लोग तुम्हे लेके जा रहे हैं..
तुम आज इतनी उदास क्यों हो,,क्यों इतनी डरी सहमी ,
नम आँखे लिए मुझपर हाथ फेर रही हो?
........ओह्ह,शायद घर में पता चल गया,,कि तुम्हारी कोख में
मैं पल रही हूँ,इस घर का वारिस नही,,बेटा नही,एक बेटी
उफ्फ्फ्फ़ तेरी अजन्मी.................
तू रो मत माँ,मैं तुझसे खफा नही हूँ,
..समाज की कुरीतियों और तुम्हारी विवशता ने,,छीन लिया मुझसे मेरे पैदा होने का हक ,,
छीन लिए वो सपने,जो मैं तेरी गोद में देखती.10 Week Abortion (06)
मैं नही जन्मी तुम्हारे घर,,
लेकिन तुम्हारे मन के किसी कोने में
जन्मी है ये अजन्मी कन्या,,,,,
जिसकी किलकारी सिर्फ तुम्हे सुनाइ पड़ती है,,
जो खेलती है,माँ तेरे आंगन में
और जब गिर जाती हूँ मिटटी में लथपथ,,तुम भागकर मुझे उठा लेती हो ,,
और गोद में लेकर घंटो मुझे निहारती हो,
चूमती हो मेरे माथेको,मेरे गालों को
तबतक,
जबतक तुम्हे बाबा आकर नही ले आते तुम्हारे कल्पना लोक से बाहर,,
तुम्हारा यही प्यार बांधे है माँ मुझे तुमसे
लेकिन माँ,अब नही जन्मूँगी मैं,,
ना तुम्हारी कोख से,,
न ही किसी और कोख से,,
रहूंगी,,यूँ ही अजन्मी,,ना जाने कितने जन्मो तक..ना जाने कितने जन्मो तक......मिष्टी