About Me
- MISHTY
- New Delhi, DELHI, India
- अपने बारे में क्या कहूँ, एक अनसुलझी पहेली सी हूँ.कभी भीड़ में अकेलापन महसूस करती हूँ! तो कभी तन्हाइयों में भरी महफिल महसूस करती हूँ! कभी रोते रोते हँसती हूँ, तो कभी हंसते हंसते रो पडती हूँ. मैं खुश होती हूँ तो लगता है,सारी दुनिया खुश है,और जब दुखी होती हूँ तो सारी कायनात रोती दिखती है! क्या हूँ मैं, नहीं जानती,बस ऐसी ही हूँ मैं, एक भूलभुलैया.......
Saturday, March 7, 2015
Wednesday, August 20, 2014
ख़ामोशी
मुझे अच्छा लगा उस दिन,
जिस दिन मैं सच में अकेली रह गई थी
और तुमने जबरन मुझे गले से लगा लिया था,
और मैं घंटों सिर्फ रोती रही
ना तुम कुछ बोले ,ना ही मैंने कुछ कहा
सिर्फ मेरी सिसकियाँ तुम्हे बयां करती रही मेरी दास्ताँ
और हमेशा की तरह तुम
सुनते रहे मेरी ख़ामोशियाँ ................ 2014
जिस दिन मैं सच में अकेली रह गई थी
और तुमने जबरन मुझे गले से लगा लिया था,
और मैं घंटों सिर्फ रोती रही
ना तुम कुछ बोले ,ना ही मैंने कुछ कहा

सिर्फ मेरी सिसकियाँ तुम्हे बयां करती रही मेरी दास्ताँ
और हमेशा की तरह तुम
सुनते रहे मेरी ख़ामोशियाँ ................ 2014
एक तेरा अहसास
मैं जानती हूँ कि
तुम मेरे आस पास कहीं नही हो
फिर भी तुमसे बातें करती हूँ;
ये भी जानती हूँ कि
जब हम साथ होंगे
मैं तुमसे कुछ भी नही कह पाउंगी.
ना ही तुमसे आँख मिला पाऊँगी,
लेकिन ये भी जानती हूँ की
जितनी बातें तुमसे की है
उतनी तो किसी से भी नही कर पाई
तुम मेरे अहसास में
मुझे कितना सुकून देते हो
कितना साथ निभाते हो,
ये तो तुम्हे भी नही पता ,,,,
पर मेरा ये अहसास कभी नही तोडना
मैं जानती हूँ की
तुम्हे नही पता कि
वो तुम्ही हो
जिससे मैं घंटों बातें करती रहती हूँ
अपने सारे ख़ुशी और गम
कहकर अपना मन हल्का कर लेती हूँ। .
लेकिन फिर भी तुम्हे खोने से डरती हूँ
तुम बदल तो ना जाओगे मेरे दोस्त …………… जुलाई 14 ………………
तुम मेरे आस पास कहीं नही हो
फिर भी तुमसे बातें करती हूँ;
ये भी जानती हूँ कि
जब हम साथ होंगे
मैं तुमसे कुछ भी नही कह पाउंगी.
ना ही तुमसे आँख मिला पाऊँगी,
लेकिन ये भी जानती हूँ की
जितनी बातें तुमसे की है
उतनी तो किसी से भी नही कर पाई
तुम मेरे अहसास में
मुझे कितना सुकून देते हो
कितना साथ निभाते हो,
ये तो तुम्हे भी नही पता ,,,,
पर मेरा ये अहसास कभी नही तोडना
मैं जानती हूँ की
तुम्हे नही पता कि
वो तुम्ही हो
जिससे मैं घंटों बातें करती रहती हूँ
अपने सारे ख़ुशी और गम
कहकर अपना मन हल्का कर लेती हूँ। .
लेकिन फिर भी तुम्हे खोने से डरती हूँ
तुम बदल तो ना जाओगे मेरे दोस्त …………… जुलाई 14 ………………
Saturday, June 21, 2014
घटाव
कभी सूर्य को ढलते हुए देखा है
कैसे उसकी चमक फीकी होती जाती है
ऐसे ही मैंने अपने को देखा है,मुरझाते हुए
सिमटती जा रही हूँ ,अपने में ही
अपने को पड़ती हूँ,रात्रि के आधे पहर में
और घंटो रोती हूँ ,सिर्फ अपने लिए..........
अपने को कतरा -कतरा घटते सिर्फ देख रही हूँ
कुछ नही कर पा रही
क्या कभी फिर से पहले की तरह
उन्मुक्त गगन में उड़ पाऊँगी
क्या मिलेगा मुझे कोई
जो मुझे उड़ने के लिए पर देगा .............
शायद हाँ ,,,,,,तभी तो किसी का इंतज़ार रहता है
इन सूनी आँखों को......................... 21 -6 -14 …………
Sunday, June 1, 2014
बिखराव
कितना तोड़ोगे,कितना बिखेरोगे
और कितना मुझे तड़पाओगे
मेरी गलती सिर्फ इतनी ही है ना,
की मैंने तुम्हे चाहा
दिलों जां से चाहा
सबसे ज्यादा तुम्हे ही चाहा
तेरे एक छोटे से मज़ाक ने
मेरे १४ साल ----------------
शायद अब कभी ना जुड़ पाउँगी
लेकिन मेरे बिखरने से क्या
तुम संभल पाओगे 31 -5 -14 ..........
और कितना मुझे तड़पाओगे
मेरी गलती सिर्फ इतनी ही है ना,
की मैंने तुम्हे चाहा
दिलों जां से चाहा
सबसे ज्यादा तुम्हे ही चाहा
तेरे एक छोटे से मज़ाक ने
मेरे १४ साल ----------------
शायद अब कभी ना जुड़ पाउँगी
लेकिन मेरे बिखरने से क्या
तुम संभल पाओगे 31 -5 -14 ..........
Friday, May 30, 2014
यादें
तेरी यादों को किसी अलमारी में बंद करके नही रखा
बल्कि बहुत सम्भाल कर रखा है
क्योंकि अलमारी में रखी चीजें बेतरतीब हो जाती हैं
तुम्हे कैसे देख पाऊँगी मैं बेतरतीब
ना ही तुम्हे मैने दिल में बंद करके रखा है
क्यूंकि वहां तो तुम गुम ही हो जाओगे
और मैं तुम्हे गुमाना नही चाहती
क्यूंकि दिल में अगर खो गए तो

हर लम्हा दिल तुम्हे ही ढूंढेगा
और तुम छटपटाते रहोगे
मुझे परेशान देखकर
तुम्हारी यादों को हमेशा अपने साथ ही रखती हूँ
हँसता खिलखिलाता सा
ताकि जब भी मैं दुखी होऊं
तुम झट से अपनी याद का झोंका दो
और मैं खिल जाऊं
क्या कभी इन यादों से बाहर आकर मिलोगे मुझे
क्या पहचान पाओगे मुझे?
पर मैं तुम्हारी यादों को कभी अपने से दूर नही करुँगी
सिर्फ और सिर्फ करुँगी इंतज़ार तुम्हारा
क्या पता कभी तुम आ ही जाओ
यादें बनकर नही
कुछ और --------------------31-5-14
Thursday, May 29, 2014
रिश्ता
कौन सा रिश्ता अपना होता है
कौन सा रिश्ता सच्चा होता है
क्या कोई बता सकता है
वो जहाँ आप अपना बचपन बिताते हैं
जहाँ आपकी किलकारियों को सुन माँ
रीझ जाती है.
जहाँ आपकी सभी फरमाईश पूरी की जाती थी
लेकिन जहाँ आप रिश्तो की पकड़ मजबूत करना चाहते हैं
तभी आपसे कहा जाता है,
बेटी तो पराया धन होती है
जा बेटी अपने घर जा
हम तुझे विदा करते हैं एक अजनबी के साथ
अनजान देश में ,अनजान लोगों के बीच
और यहाँ से होती है रिश्तों की दूसरी दुनिया
जहाँ आपका नाम तक छीन लेते हैं
और आप बन जाती हैं mrs........
जहाँ अाप अपना सर्वस्व देकर भी
पराई हो
जहाँ सात फेरे के वचन के बाद
कभी भी बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है
ऐसे में किस रिश्ते को सच माना जाये
कहाँ जाय
दोनों तरफ से पराई
किसका मुंह ताके
जिसने पालपोस कर विदा कर दिया
या जिसने जीवन भर साथ निभाने के वादे को
तोड़ दिया
दोनों ने ही रास्ता तो बाहर का ही दिखाया। ……………
फिर कौन सा रिश्ता अपना है ?बोलो ना ................... २१ मई १४
कौन सा रिश्ता सच्चा होता है
क्या कोई बता सकता है
वो जहाँ आप अपना बचपन बिताते हैं
जहाँ आपकी किलकारियों को सुन माँ
रीझ जाती है.
जहाँ आपकी सभी फरमाईश पूरी की जाती थी
लेकिन जहाँ आप रिश्तो की पकड़ मजबूत करना चाहते हैं
तभी आपसे कहा जाता है,
बेटी तो पराया धन होती है
जा बेटी अपने घर जा
हम तुझे विदा करते हैं एक अजनबी के साथ
अनजान देश में ,अनजान लोगों के बीच
और यहाँ से होती है रिश्तों की दूसरी दुनिया
जहाँ आपका नाम तक छीन लेते हैं
और आप बन जाती हैं mrs........
जहाँ अाप अपना सर्वस्व देकर भी
पराई हो
जहाँ सात फेरे के वचन के बाद
कभी भी बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है
ऐसे में किस रिश्ते को सच माना जाये
कहाँ जाय
दोनों तरफ से पराई
किसका मुंह ताके
जिसने पालपोस कर विदा कर दिया
या जिसने जीवन भर साथ निभाने के वादे को
तोड़ दिया
दोनों ने ही रास्ता तो बाहर का ही दिखाया। ……………
फिर कौन सा रिश्ता अपना है ?बोलो ना ................... २१ मई १४
मैं
धुंधला गई हूँ
टूट गई हूँ
बिखर गई हूँ
कहीं खो गई हूँ
क्या हो गई हूँ मैं
सिर्फ एक तेरे बदल जाने से ……… मई 14 …………
टूट गई हूँ
बिखर गई हूँ

कहीं खो गई हूँ
क्या हो गई हूँ मैं
सिर्फ एक तेरे बदल जाने से ……… मई 14 …………
घुटन
किसी को नही पता ,कौन किसका कब तक साथ निभाएगा
जरुरी नही कि उम्रदराज या बीमार ही पहले जाये
क्या पता ,कोई अंदर ही अंदर घुट -२ कर मर रहा हो
वो ही अलविदा कह जाये.
तो सभी को प्यार दो
क्या पता,किसी का कल हो ना हो
और तुम हाथ मलते ही रह जाओ
कभी भी लफ़्ज़ों के भरोसे मत रहो
ख़ामोशी की जुबां भी समझो
.... 29 -5 -14
जरुरी नही कि उम्रदराज या बीमार ही पहले जाये
क्या पता ,कोई अंदर ही अंदर घुट -२ कर मर रहा हो
वो ही अलविदा कह जाये.
तो सभी को प्यार दो
क्या पता,किसी का कल हो ना हो

और तुम हाथ मलते ही रह जाओ
कभी भी लफ़्ज़ों के भरोसे मत रहो
ख़ामोशी की जुबां भी समझो
.... 29 -5 -14
Wednesday, May 14, 2014
तन्हाई
मैं तो हँस रही थी ना
मैने तो तुमसे कुछ नही कहा
फिर मुझे तन्हाई मे देख कर
क्यों तुम रो पड़े
बोलो ना…………
क्या आज भी तुम
मुझे भूल नहीं पाए
नही भूल पाये मेरी आदत
तन्हाई में अपने दुख --------------
हाँ आज भी मैं
जब भी दुखी होती हूँ
तन्हाई में ही रहना पसन्द करती हूँ …………… 14 -5 -14
मैने तो तुमसे कुछ नही कहा
फिर मुझे तन्हाई मे देख कर
क्यों तुम रो पड़े
बोलो ना…………
क्या आज भी तुम
मुझे भूल नहीं पाए
नही भूल पाये मेरी आदत
तन्हाई में अपने दुख --------------
हाँ आज भी मैं
जब भी दुखी होती हूँ
तन्हाई में ही रहना पसन्द करती हूँ …………… 14 -5 -14
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