About Me
- MISHTY
- New Delhi, DELHI, India
- अपने बारे में क्या कहूँ, एक अनसुलझी पहेली सी हूँ.कभी भीड़ में अकेलापन महसूस करती हूँ! तो कभी तन्हाइयों में भरी महफिल महसूस करती हूँ! कभी रोते रोते हँसती हूँ, तो कभी हंसते हंसते रो पडती हूँ. मैं खुश होती हूँ तो लगता है,सारी दुनिया खुश है,और जब दुखी होती हूँ तो सारी कायनात रोती दिखती है! क्या हूँ मैं, नहीं जानती,बस ऐसी ही हूँ मैं, एक भूलभुलैया.......
Friday, November 30, 2012
अब न जुड पाऊँगी
फूल की पत्तियों की तरह तोड़ दिया मुझको
खूब अच्छे से मसल कुचल दिया मुझको
अब क्या चाहते हो
अब जब तोड़ने के लिए कुछ न बचा
तो मुझे जोड़ना चाहते हो
फिर से तोड़ने के लिए ?
अरे टूटा हुआ तो फूल भी नही जुड़ता 
तो मैं तो एक जीती जागती ---------------
जिसे पल पल आपने तोडकर बिखेरा है
अब क्यों उसे जोड़ने की कौशिश कर रहे हैं
क्योंकि इतना टूटने के बाद अब न मैं
जुड़ पाने की स्थिति में रह गई हूँ
और ,,न आपके वश की बात !!!!!!!!!
अगर कर सको तो सिर्फ इतना कर दो
मेरे टूटे हुए बिखरे टुकड़े समेट दो
कर पाओगे नव
इतना //
30-11-12...............
गुमनाम
कितने सालों बाद
अब तुम मिले हो जो
मेरी पुरानी सूरत मांगते हो
कहाँ से लाऊं
जो अब पता नही गुमनामी
के किस अंधेरो में खो
चुकी है
2012...............
अब तुम मिले हो जो
मेरी पुरानी सूरत मांगते हो
कहाँ से लाऊं
जो अब पता नही गुमनामी
के किस अंधेरो में खो
चुकी है
2012...............
Monday, October 15, 2012
जानती थी मैं
जानती थी मैं,,
मुझे कोई भी मेरे जैसा नही मिलेगा.
फिर भी विश्वास करने की बुरी आदत है
तो कर लिया
फिर वही धोखा ,,अविश्वास ----------------------वही सब दिखावा
क्या सच में कोई नही
जो सिर्फ और सिर्फ मेरा हो
मुझे पता है,,एक दिन वो मिलेगा
जरूर मिलेगा ,,
उसी के इंतज़ार में तो
पलकें बिछाए बैठी हूँ,,,,,,,,,,,,,
वो जरूर मिलेगा
एक दिन........................................
मुझे कोई भी मेरे जैसा नही मिलेगा.
फिर भी विश्वास करने की बुरी आदत है
तो कर लिया
फिर वही धोखा ,,अविश्वास ----------------------वही सब दिखावा
क्या सच में कोई नही
जो सिर्फ और सिर्फ मेरा हो
मुझे पता है,,एक दिन वो मिलेगा
जरूर मिलेगा ,,
उसी के इंतज़ार में तो
पलकें बिछाए बैठी हूँ,,,,,,,,,,,,,
वो जरूर मिलेगा
एक दिन........................................
Tuesday, October 9, 2012
वापिस
लो अजनबी ,
सिमटा लिया मैंने अपने आपको
वापिस उसी तरह
जैसे जी रही थी,तुमसे मिलने से पहले
पर तुम्हे नही भूल पाऊँगी,
तुमने मुझे पर तो दिए उड़ने के लिए
लेकिन जैसे ही मैं उडी
तुमने मुझे आकाश तक
पहुँचने ही नही दिया
और अपनी असलियत दिखा दी
लो अजनबी,सिमट गई मैं
वापिस 
अब कभी न उड़ने और अजनबियों पर
कभी विस्वास न करने के लिए
सिमटा लिया मैंने अपने आपको .....................
dec.12.......
अजनबी
तुम कौन हो अजनबी,,
जो मेरी वीरान जिन्दगी में बाहर लेकर आये हो.
मैं तुम्हें जानती नही,,
पहचानती नही,,फिर भी तुम्हारा इंतज़ार करती हूँ..
कौन हो तुम
क्यों आये हो,,पतझड़ में फूल खिलाने
तुम भी चले जाओगे एक दिन,,
मुझे यूँ ही अकेला छोडकर
तुम चले जाओ
इससे पहले कि
मैं एक बार फिर से टूट कर बिखर जाऊँ
तुम चले जाओ अजनबी,,
मेरी जिन्दगी से चले जाओ,,
क्योंकि शायद एक बार का और टूटना
मैं बर्दास्त ना कर पाऊ.........................
जो मेरी वीरान जिन्दगी में बाहर लेकर आये हो.
मैं तुम्हें जानती नही,,
पहचानती नही,,फिर भी तुम्हारा इंतज़ार करती हूँ..
कौन हो तुम
क्यों आये हो,,पतझड़ में फूल खिलाने
तुम भी चले जाओगे एक दिन,,
मुझे यूँ ही अकेला छोडकर
तुम चले जाओ
इससे पहले कि
मैं एक बार फिर से टूट कर बिखर जाऊँ

तुम चले जाओ अजनबी,,
मेरी जिन्दगी से चले जाओ,,
क्योंकि शायद एक बार का और टूटना
मैं बर्दास्त ना कर पाऊ.........................
Saturday, October 6, 2012
उर्मिला
तुमने तो जाते हुए आराम से कह दिया \
कि रोना नही,,
मैंने भी भरी आँखों से तुम्हें वचन दे दिया,,,,,,,
जुबां से बोलती तो रो पड़ती
चुपके से सर हिला दिया मैंने ,,,,,,,,
अब महसूस किया उर्मिला का दर्द 

जिसने विरह में 14 साल
आँसू गिरने ना दिए
पर मैं इन पलकों का क्या करूँ
जो मेरे आंसुओं का बोझ उठा ही नही पा रही........
6-10-12........
Sunday, September 30, 2012
नया सवेरा
सूर्य की रौशनी
हर तरफ उजाला करती है
फिर मेरे दिल के भीतर ही
क्यों अँधियारा छाया है ,,,,,,,
क्या मेरे लिये भी सूर्य कभी
अपने अंदर छुपा के लाएगा सवेरा;
सवेरा !
जो मेरे अंदर से
अंधियारे को भगा देगा ,,,,
वो सवेरा जो सिर्फ मेरे लिये होगा
एक नया सवेरा ,,मेरा सवेरा
जो आएगा तो सिर्फ
मेरे अधरों पे मुस्कान बिखेरने के लिए
जो होगी मेरी मुस्काती सुबह.......................
हर तरफ उजाला करती है
फिर मेरे दिल के भीतर ही
क्यों अँधियारा छाया है ,,,,,,,
क्या मेरे लिये भी सूर्य कभी
अपने अंदर छुपा के लाएगा सवेरा;
सवेरा !
जो मेरे अंदर से
अंधियारे को भगा देगा ,,,,
वो सवेरा जो सिर्फ मेरे लिये होगा
एक नया सवेरा ,,मेरा सवेरा
जो आएगा तो सिर्फ
मेरे अधरों पे मुस्कान बिखेरने के लिए
जो होगी मेरी मुस्काती सुबह.......................
डर
अपनी खुशियों को जाहिर करने से डर लगता है
क्योंकि हर इंसा मुझे नज़र लगाता
सा लगता है,,
लग ना जाए इन खुशियों को ग्रहण
इसलिए
कभी -कभी तो खुद ही की
नज़र का डर लगता है,,,,,
इतने दुःख सह चुकी हूँ
हर शख्श से धोखा खा चुकी हूँ
अब तो हाथ ऊपर उठाकर देखने में भी
भगवान धोखा ना दे दे
ये डर लगता है ...............
गमों में इतना घिर चुकी हूँ
आशा की किरण से भी डर लगता है
हे भगवान ,,
जो मुस्कान इतने सालों में आई है
उसे तेरी मेरी
नज़र ना लगने देना
कहीं तुझसे भी पूरा भरोसा ना उठ जाए
इस अंजाम से भी डर लगता है.....................
क्योंकि हर इंसा मुझे नज़र लगाता
सा लगता है,,
लग ना जाए इन खुशियों को ग्रहण
इसलिए
कभी -कभी तो खुद ही की
नज़र का डर लगता है,,,,,
इतने दुःख सह चुकी हूँ
हर शख्श से धोखा खा चुकी हूँ
अब तो हाथ ऊपर उठाकर देखने में भी
भगवान धोखा ना दे दे
ये डर लगता है ...............
गमों में इतना घिर चुकी हूँ
आशा की किरण से भी डर लगता है
हे भगवान ,,
जो मुस्कान इतने सालों में आई है
उसे तेरी मेरी
नज़र ना लगने देना
कहीं तुझसे भी पूरा भरोसा ना उठ जाए
इस अंजाम से भी डर लगता है.....................
Friday, September 28, 2012
किसी के साथ अपनी जिन्दगी के सबसे
सुनहरे पल
हंसकर ,रोकर .सुखी रहकर दुखी रहकर
जैसे भी तुमने गुजारे
तुमने उस अजनबी को
अपना सर्वस्व दे दिया
१ उम्र बिता दी उसके साथ
जब वही अजनबी
जो आपका सब कुछ हो चूका है
आपको बोले की तुमने किया ही क्या है
मेरे लिए
तब आपका पूरा अस्तित्व
एक पल में
बिखर जाता है,टूटे हुए कांच की तरह ......मिष्टी 29\9\12
सुनहरे पल
हंसकर ,रोकर .सुखी रहकर दुखी रहकर
जैसे भी तुमने गुजारे
तुमने उस अजनबी को
अपना सर्वस्व दे दिया
१ उम्र बिता दी उसके साथ
जब वही अजनबी
जो आपका सब कुछ हो चूका है
आपको बोले की तुमने किया ही क्या है
मेरे लिए
तब आपका पूरा अस्तित्व
एक पल में
Subscribe to:
Posts (Atom)