About Me

New Delhi, DELHI, India
अपने बारे में क्या कहूँ, एक अनसुलझी पहेली सी हूँ.कभी भीड़ में अकेलापन महसूस करती हूँ! तो कभी तन्हाइयों में भरी महफिल महसूस करती हूँ! कभी रोते रोते हँसती हूँ, तो कभी हंसते हंसते रो पडती हूँ. मैं खुश होती हूँ तो लगता है,सारी दुनिया खुश है,और जब दुखी होती हूँ तो सारी कायनात रोती दिखती है! क्या हूँ मैं, नहीं जानती,बस ऐसी ही हूँ मैं, एक भूलभुलैया.......

Saturday, September 24, 2011

मैंने उनसे पूछा

मैंने उनसे पूछा
    आज तुम मुझे धुंधले क्यों दिखाई देते हो,
वो पास आये और
      मेरी आँखों को लगभग निचोड़ते हुए बोले
लो,अब साफ दिखाई दूँगा.
           तो क्या प्रिये,
तुम मेरे मन में नहीं रहते
       आँख गीली थीं भी तो क्या
मुझे तुम मन की आँखों से भी धुंधले ही
      क्यों दीख पड़ते हो
क्या मेरा तन,मन
      मेरा वर्चस्व ही रोया हुआ है,
मेरी पलकों के संग मेरा
      सर्वस्व ही भीगा पड़ा है.......

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